Own Poetry Hindi

हम ज़िंदा रहेंगे

(Follow up to छीन लो)

तुम एक भाषा समझते हो,
उसको बंद कर डालोगे।
हज़ार और हैं दुनिया में,
किस-किस को भला संभालोगे?

विरोध की भाषा ज़िंदा रहेगी।
कवि लिखेंगे,
और कविता ज़िंदा रहेगी।

तुम सड़कें बंद कर दोगे तो
महलों की छत गिर जाएँगी,
खुला फ़लक रह जाएगा
नीचे गलियाँ बन जाएँगी।

उम्मीद के तारे जिंदा रहेंगे।
लोग उठेंगे,
इंक़लाबी नारे ज़िंदा रहेंगे।

आज ज़हर तुम्हारा बोलता है, लेकिन
होता था शहद उनकी ज़ुबान पर।
तुम्हारे ही धोखे से स्वाद फिरेगा,
वश नहीं रहेगा तुम्हारा आवाम पर।

काट ज़हर की जिंदा रहेगी।
रस आएगा,
गुड़ की चाशनी ज़िंदा रहेगी।

कुछ मरेंगे, कुछ सालों जेल सड़ेंगे,
कुछ लोग हममें से दब जाएंगे,
कुछ रास्ते भी बदल ही लेंगे,
कुछ डरेंगे, और भग जाएंगे।

सब नहीं, भले कुछ कम जिंदा रहेंगे,
सालों बाद भी,
किसी ना किसी में हम जिंदा रहेंगे।

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छीन लो

कवि का अलंकार छीन लो,
कागज़ की दीवार उठा कर
निर्बल की पुकार छीन लो।

यौवन की ललकार छीन लो,
तोड़ समाज का ताना-बाना
बुढ़ापे का आधार छीन लो।

नोट का सारोकार छीन लो,
बंद कर दो इंटरनेट, मज़लूम
की हाहाकार छीन लो।

प्रगति की रफ़्तार छीन लो,
समय के बढ़ते पहिए की तुम
ताक़त ओ सरकार छीन लो।

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पाप का घड़ा

जाने कैसा नियम बुना है,
पर मैंने ऐसा सुना है,
कि तुम्हारे भगवान
दयालु और बलवान
पाप का घड़ा भरने का
इंतज़ार करते हैं।
फिर अवतार लेकर
पापी का संहार करते हैं।
तो क्या इनके पापों का घड़ा,
अब तक नहीं भरा?

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चिंगारी

एक चिंगारी सुलगी तो थी
फिर बुझ गई।
 
कुछ भी जला नहीं,
कोई मरा नहीं।
 
बस किसी की जान
थोड़ी उलझ गई।
Photo by Paul Bulai on Unsplash
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देवी

तुम्हें देवी का दर्ज़ा दिया है ना हमने?

तो देवी!

तुम मंदिर में रहो।
जिसका हम अपनी सुविधा से
दरवाज़ा दोपहर में बंद कर के
अपनी नींद पूरी करने जा सकें।

और रात में जहाँ मर्ज़ी हो
जाकरअपनी हवस बुझा सकें।

और सुबह माथा टेक कर मंदिर में
करनी का बोझ भुला सकें।

देवी!

तुम सड़कों पर मत आओ,
हमारे किये की याद मत दिलाओ,
जवाब के लिए आवाज़ मत उठाओ।

क्योंकि मंदिर का नहीं भी सही,
पर जेल का दरवाज़ा तो है ही।
और वह चौबीस घण्टे बंद रहता है।
और तुम्हें मंदिर की मूरत से भी
ज़्यादा मूक कर सकता है।

देवी!

अपने घर वापस जाओ।
समाज को आईना मत दिखाओ।

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आओ कुछ सैटेलाइट्स गिराएँ।

आओ कुछ सैटेलाइट्स गिराएँ।

नोटबंदी – किसान हारा,
जॉब्स ढूँढ़ता यूथ बेचारा।
उनके दर्द दूर करें हम-
आज उनका दिल बहलाएँ।

आओ कुछ सैटेलाइट्स गिराएँ।

पॉलिसी, डिफ़ेंस, वर्ल्ड हंगर
सॉल्व करते हैं न्यूज़ एंकर।
उनकी ही फिर से सुनें हम-
कुछ सनसनीखेज कर जाएँ।

आओ कुछ सैटेलाइट्स गिराएँ।

नीति-अनीति, छल कपट से,
साम-दाम या दंड-भेद से,
जिनसे दिक़्कत हो उन सबका
वोटर लिस्ट से नाम हटाएँ।

आओ कुछ सैटेलाइट्स गिराएँ।

Photo by NASA on Unsplash

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क्रम

गीत पहले निकले
सरगम के नियम बाद में आए,
रंग पहले उड़े
होलिका के किस्से फिर बनाए।

ताक़त पहले हड़पी
राजनीति बाद में ढूँढ़ी,
क़त्ल पहले हुए
युद्ध के सिद्धांत फिर घुसाए।

बुद्धिमान पहले चुने
परिभाषा बुद्धि की फिर आई,
शासक बने पहले, बाद में
सही-गलत के भेद बताए।

Photo by Arthur Osipyan on Unsplash