Own Poetry Hindi

आओ कुछ सैटेलाइट्स गिराएँ।

आओ कुछ सैटेलाइट्स गिराएँ।

नोटबंदी – किसान हारा,
जॉब्स ढूँढ़ता यूथ बेचारा।
उनके दर्द दूर करें हम-
आज उनका दिल बहलाएँ।

आओ कुछ सैटेलाइट्स गिराएँ।

पॉलिसी, डिफ़ेंस, वर्ल्ड हंगर
सॉल्व करते हैं न्यूज़ एंकर।
उनकी ही फिर से सुनें हम-
कुछ सनसनीखेज कर जाएँ।

आओ कुछ सैटेलाइट्स गिराएँ।

नीति-अनीति, छल कपट से,
साम-दाम या दंड-भेद से,
जिनसे दिक़्कत हो उन सबका
वोटर लिस्ट से नाम हटाएँ।

आओ कुछ सैटेलाइट्स गिराएँ।

Photo by NASA on Unsplash

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क्रम

गीत पहले निकले
सरगम के नियम बाद में आए,
रंग पहले उड़े
होलिका के किस्से फिर बनाए।

ताक़त पहले हड़पी
राजनीति बाद में ढूँढ़ी,
क़त्ल पहले हुए
युद्ध के सिद्धांत फिर घुसाए।

बुद्धिमान पहले चुने
परिभाषा बुद्धि की फिर आई,
शासक बने पहले, बाद में
सही-गलत के भेद बताए।

Photo by Arthur Osipyan on Unsplash

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ये बढ़िया चौकीदारी है।

ये बढ़िया चौकीदारी है।

चोर घूमें सड़कों पर
और चोर से तुम्हें बचाने को
तुम पर ही पहरेदारी है।
ये बढ़िया चौकीदारी है।

तनख्वाह इस चौकीदार की
आती जाने किस द्वार से?
ये हम पर बहुत ही भारी है।
ये बढ़िया चौकीदारी है।

कुछ सत्तर साल पुराने
एक दूजे चौकीदार का
भूत इनपर भारी है।
ये बढ़िया चौकीदारी है।

इंतजार वेकैन्सी का करना
तुम छोड़ो, ट्विटर पर
अब आबंटन की बारी है।
ये बढ़िया चौकीदारी है।

Featured Image Credit: Photo by Mohan Moolepetlu on Unsplash

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कंकड़-पत्थर

राहों में चलते-चलते
कुछ मज़ेदार शक़ल के,
जो कंकड़-पत्थर मिले
हमने उठा लिए।

कभी कहीं किसी की
नज़रें मिली पारखी,
उन्हें अलट-पलट के
हीरे बता दिए।

हमसे तो ना बना
उनका मोल-भाव किए,
जो दाम दिया उन्होंने
ले हम आगे बढ़ गए।

Photo by Jeremy Thomas on Unsplash

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ख़ून की मांग

ख़ून के बदले ख़ून
मांग तो मैं भी लूं,
लेकिन वह ख़ून लेने
मैं तो जाऊंगी नहीं।
तो किस मुंह से मांगू
जो ख़ुद मैं लाऊंगी नहीं‌‌‍?

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नियम-क़ानून

स्टूडेन्ट हो,
एक्टिविस्ट न बनो।
एक्टिविस्ट हो,
किताबें ना पढ़ों।

हिन्दू हो,
मीट ना खाओ।
मुसलमान हो,
पाकिस्तान जाओ।

सरकार के आगे
सर झुकाओ।
डेमाक्रेसी का
भाव ना खाओ।

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आप फ़रमायें

हम तो जब वो पावर में आएंगे
तब उनपर भी सवाल उठाएंगे।
आप फ़रमायें,
कैसे हुक़ूमत बदलने पर आप
आज के दिन को कल रात
और रात को दिन बताएंगे?