politics · Thoughts

सरकार और नागरिक बराबर नहीं हैं।

सरकार एक संस्था (इन्सटीट्यूशन) है।
नागरिक एक व्यक्ति-मात्र है।

सरकार के पास बहुत पावर होती है, क्योंकि उसे देश चलाना होता है।
एक नागरिक के पास वह पावर नहीं होती। इसलिए उसे संविधान ने मौलिक अधिकार दिए हैं, ताकि सरकार की पावर का इस्तेमाल नागरिक के ख़िलाफ़ ना होने लगे।

चूँकि सरकार एक पावरफुल संस्था है, नागरिकों के लिए पारदर्शी रहना उसकी ज़िम्मेदारी है।
चूँकि नागरिक एक व्यक्ति-मात्र है और उसके पास सरकार जैसी पावर नहीं है, उसके पास अधिकार हैं जीवन, स्वतंत्रता और निजता के (rights to life, liberty, and privacy). ये अधिकार नागरिक के पास सरकार के ख़िलाफ़ भी उपलब्ध हैं, बल्कि ख़ास कर सरकार के ख़िलाफ़। एक नागरिक को सरकार से सवाल पूछने का भी अधिकार है।

जब सरकार नागरिकों के सवाल और शिक़ायतें नहीं सुनती, या उनसे बात नही करती, तो वह गलत है, क्योंकि सरकार का अस्तित्व ही नागरिकों के लिए है। नागरिकों को सुनना और उनकी शिकायतों को दूर करने के लिए क़दम उठाना ही सरकार का काम है।
जब एक नागरिक किसी दूसरे नागरिक की बात नहीं सुनना चाहता या उससे बहस नहीं करना चाहता – जैसे कि सोशल मीडिया पर, वह गलत नहीं है। ये उसका काम नहीं है। उसे अपनी ज़िंदग़ी अपने तरीके से जीने का अधिकार है।

चूँकि सरकार एक पावरफुल संस्था है, उसे अपनी हर शाखा, हर विभाग, हर हिस्से के काम की ज़िम्मेदारी लेनी होती है।
चूँकि नागरिक व्यक्ति-मात्र है, सरकार एक व्यक्ति की गलती की वजह से किसी और के अधिकार नहीं छीन सकती है। सरकार के पास गलती करने वाले को क़ानूनी तरीके से सजा देने के कई तरीके उपलब्ध हैं।

ऊपर की गई बात का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष ये है कि “लोग भी तो गलती करते हैं” कह के सरकार (या किसी सरकारी विभाग जैसे कि पुलिस) को कानून तोड़ने का, नागरिकों पर हमला करने का, या संविधान को भंग करने का अधिकार नहीं मिल जाता है।

जब सरकार नागरिकों से प्रतिरोध का अधिकार छीन लेती हैं, या उन्हें सार्वजनिक स्थानों के उपयोग से वंचित करती है, तो वह फा़सिस्ट कहलाई जाएगी। सरकार के पास नागरिकों ये सह सब छीनने का अधिकार नहीं है।
लेकिन जब मैं trolls को अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स से या मेरे घर से दूर रहने को कहती हूँ, तो मैं सिर्फ अपने जीवन, स्वतंत्रता और निजता के अधिकारों का इस्तेमाल करती हूँ। और अपने संपत्ति के अधिकार का भी। मैं एक व्यक्ति हूँ। सरकार नहीं। मुझे किसी को अपने घर में या अपने अकाउंट में आने देने की ज़रूरत नहीं है। सरकार को भी नहीं, जब तक वह क़ानूनी तरीके से नहीं आती।

इसलिए जब भी मैं नागरिकों के अधिकार की बात करूँ, मुझसे पलट कर सरकार के अधिकारों की मांग ना कीजिए। सरकार को अधिकारों की ज़रूरत नहीं है। सरकार के पास ऐसे ही बहुत पावर है। सरकार की पावर पर अंकुश लगाने की ज़रूरत है। और नागरिकों के अधिकार वह अंकुश लगाते हैं।

One thought on “सरकार और नागरिक बराबर नहीं हैं।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s