बचपन में बताया था किसी ने

बचपन में बताया था किसी ने
कि तारे उतने पास नहीं होते
जितने दिखते हैं।
नहीं समझी थी मैं तब,
अब समझती हूँ।

बचपन में बताया था किसी ने
कि सूरज बड़ा दिखता चाँद से
फिर भी वो ज़्यादा दूर है।
नहीं समझी थी मैं तब,
अब समझती हूँ।

बचपन में बताया था किसी ने
चलती गाड़ी पर कि पेड़ नहीं
हम भाग रहे हैं।
नहीं समझी थी तब
अब समझती हूँ।

कोई पास होकर भी दूर कैसे होता है
नज़दीक दिखती चीज़ें कितनी दूर होती हैं
और हम भाग रहे होते हैं चीज़ों से
पता भी नहीं चलता
मान बैठते हैं कि क़िस्मत बुरी है
और चीजें भाग रहीं हैं हमसे।

अब समझती हूँ।

3 thoughts on “बचपन में बताया था किसी ने

  1. bachpan main bataya tha kisi ne,
    shabd bas do char hote hain,
    par kis tarh ek kavita ban jaati hai,
    en do chaar shabdo main ek zindagi simat jaati hai,
    us simati zindagi main ab hum sab jiya karte hain,
    khud ba khud kuchh sapne buna karte hain,
    aur phir har baar ki tarah mud kar bas yahi kaha karte hain,
    haan ab sab samajhte hain hum.
    sab samjhte hain hum.

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